तीसरा रास्ता
88 मौलिक अधिकारों के संषर्ष की तैयारी रामनाथ शिवेंद्र का उपन्यास तीसरा रास्ता नन्द किशोर नीलम एन.जी.ओ. की भूमिका पर अनगिनत सवाल उठते रहे हैं। एन.जी.ओ. ने अपनी कार्यप्रणाली और समग्र व्यवहार से बराबर ऐसे हालात पैदा किए हैं जिससे तमाम धारणायें पुष्ट और प्रमाणित हुई हैं कि इनकी भूमिका विकास विरोधी दलालों की तरह है। निरीह जनता के हिस्से की कल्याणकारी योजनाओं की अकूत राशि इनके पंचतारा ऐशो.आराम पर खर्च कर दी जाती है। बाड़ ;बाउन्ड्री का काम खेत की रखवाली करना होता है पर यदि बाड़ ही खेत खाने लगे तो! संभवतः एन,जी,ओ, ओ की भूमिका पर अपनी रचनात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त करने वाले रामनाथ शिवेन्द्र के महत्वपूर्ण उपन्यास तीसरा रास्ता यही संशय उमड़ता.घूमता रहता है। मानवाधिकार जन समिति की एन,जी,ओ, का कर्ताधर्ता डी.बी़. जैसा शातिर व्यक्ति जिसके हाथ में समाज को बदलने की ताकत और साधन दोनों हैं शोषक व भक्षक की भूमिका में है। समाज की बेहतरी के लिए प्रयुक्त किए जाने वाले साधनों को वह समाज के विनाश के समाज की चेतना को कुंद करने के हथियारों के रूप में तब्दील करने में माहिर है वह क...